आज का डर
हार से हार कर बैठ जाना और फिर निराश हो कर जीवन में गलत प्रभाव डालना। थक कर हार मान लेना ये कह कर की मैं उस चीज़ के लायक था ही नहीं। खुशी से निराशा का सफर तय कराता है ये हार का डर। खुद को मजबूर बनाता है ये डर। सशक्त बनने से रोकता है ये डर। जीवन में आगे बढ़ने नहीं देता है ये डर।
‘डर’ एक ऐसा शब्द है जो सामना कराता है एक ऐसे सोच से जो शायद कभी सच हो ही ना। सामना करता है एक ऐसे परिस्थिति से जब खुद को खुद से ही नफरत हो जाता है। मिलाता है एक ऐसे समय से जहां नकारात्मक सोच चरम सीमा पे होता है।
आज लोगों को डर लगता है ऐसे हार से जो शायद सोच कर ही हार हो जाती है। डरते है लोग की लोग क्या कहेंगे। डरते है लोग कदम उठाने से की कही अपमान ना हो जाये। डर लगता है की कहीं लोग उनसे बात करना ना छोड़ दे। डर लगता है सच बोलने से की कोई बुरा ना मान जाए। डर लगता है परिस्थिति से की कुछ गडबड न हो जाए और डर लगता है इस समाज से जो अपनों को ही मार देते है। डर लगता है रिश्तें टूट जाने से और डर लगता है अकेले पड़ जाने से। फिर डर लगता है वो सच बताने में इस डर से की कोई समझेगा नहीं। डर लगता है खुद से हार जाने से।
जीवन में जब पहली बार हार से सामना होता है तो मानो की लगता है की जैसे पूरा जीवन ही समाप्त हो चुका है। लगता है जैसे जीवन खत्म करना ही एक मात्र उपाय है। हार की आदत हो जाने से, किस्मत को दोष दे कर आगे बढ़ जाने की भी आदत पड़ जाती है। ‘हार’ एक ऐसा शब्द है जिसके डर से कुछ जीत जाते है और कुछ इसके डर से खत्म हो जाते हैं। पर एक ऐसा भी वर्ग है जिसे इससे डर नहीं लगता और वो कर्म में भरोसा रखते है।
तो क्या हार से हारना उचित है? क्या हार के डर से पीछे हटना उचित है? आगे बढ़ना एक मात्र विकल्प होता है जब सच में कुछ करने की इच्छा हो। क्या हार का डर मर नहीं सकता? क्या दृढ़ता हार को हरा नहीं सकती? हां दृढ़ता ही एक ऐसा विकल्प है जो हरा सकता है डर को जो उकसाता है डरने के लिए। जो उकसाता है गलत कदम उठाने के लिए। जब अपना लक्ष्य साफ रहेगा तो किसी भी कदम पे सिर्फ आगे बढ़ने की राह दिखेगी। हार जाने के बाद सिख दिखेगा न की निराशा। आगे बढ़ते-बढ़ते चुनौतियां दिखेंगी जिसका हल आपके पास स्वयं ही होगा। मुकाम तक पहुंचने के बाद कामयाबी की खुशी नहीं बल्कि और आगे बढ़ने का जुनून होगा।
मत डरो उस हार से जो पहले से ही हारा है। मत रूकने दो खुद को उस डर से जिसका कोई अस्तित्व नही। कर्मों पे विश्वास और दृढ़ता ही बचा सकती है इस डर के माया से। डरना है तो डरो गलत काम करने से। डरना है तो डरो अपशब्द कहने से। पर मत डरो उससे जो जीवन के लिए उचित नहीं। बस आगे बढ़ते जाओ और पीछे मत देखना। मत देखना पीछे जब तक डर से जीत ना जाओ।

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